Thursday, September 24, 2009

प्रवीण जाखड़ जी और संगीतापुरी जी तो बहाना है, मुझे तो कुछ कर गुजरना है...1

चेतावनी-टिप्पणी देने की जल्दबाजी मे न पढ़े, इस लेख माला को शांत दिमाग से पढ़े। समय निकाल कर पढ़ें।

  • बात प्रवीन जाखड जी की.....
पंकज व्यास रतलाम
22 सितंबर को ब्लॉगवाणी को देखा कि अनायास एक हेडिंग पर नजर गई। हेडिंग थी संगीतापुरी जी को दंडवत् प्रणाम! पहले तो लगा जैसे नवरात्रि चल रही है, तो ये ब्लॉगर बंधु संगीतापुरी जी में देवी का अंश देख प्रणाम कर रहे हैं। लेकिन, हेडिंग पर चटका लगाया, टिप्पणियों पर नजर गई तो समझ में आ गया कि माजरा कुछ ओर है। सही कौन है, गलत कौन है? इस बात की चर्चा करना मेरा मकसद नहीं है और न कभी रहेगा। मेरा उद्देश्य यही नहीं रहेगा कि सही कौन है, मेरा लक्ष्य है सही क्या है?



जी हां, सही क्या है? हम बात करें प्रवीण जाखड़ जी की तो ये प्रतिक है उनके, जो धर्म में व्याप्त कुरीतियों, सड़ी गली मान्यताओं, कुप्रथाओं को से नफरत करते हैं, उनसे खीझ गएँ है। कोई इन्हें मुर्ख समझने की भूल करें, तो उसकी सबसे बड़ी भूल होगी।

प्रवीण जाखड़ उन लोगों में उन लोगों में शुमार है, जो भारतीय धर्म, संस्कृति और उसके वांगमय का सम्मान करते हैं उनसे प्रेम करते हैं, किसी आडंबर को नहीं मानते, ये वो हैं जिन्हें पोगापंथ और दकियानुसीता से चिढ़ है।
बकौल प्रवीण जाखड़, 'मैं ज्योतिष का सम्मान करने में पीछे नहीं हट रहा शशांक भाई, लेकिन बाइक का पेट्रोल खत्म हो गया, यानी ग्रह खराब थे। कार का टायर पंक्चर हो गया, ग्रह खराब था। भारत ने चीन बॉर्डर पर सेना भेज दी क्योंकि ग्रह खराब थे। एटीएम से पैसा नहीं निकला क्योंकि ग्रह खराब थे। अब आप हर बात पर ज्योतिष की तुकबंदी मारेंगे, तो किसके पचेगी।

आगे प्रवीन जाखड जी कमेन्ट में लिखते है की मैं सौ फीसदी स्वीकार करता हंू कि ज्योतिष बहुत बड़ा विज्ञान है। गणितीय है। गणितीय है इसीलिए सफल है। लेकिन मैं किसी भी तुकबंदी का पक्षधर नहीं हंू। इस मामले का संदर्भ ज्योतिष के सम्मान या अपमान से जुड़ा हुआ नहीं, अंधेरे में तीर चलाने से ज्यादा है।Ó
प्रवीन जाखड जैसे लोगों का नजरिया हर क्षेत्र में एसा ही रहता है।

प्रवीण जाखड़ जैसे लोग, किसी की बात यूं ही नहीं मान लेते। उन्हें तर्क चाहिए। इस बात का सबूत है उनकी यह कमंट: विप्ल्व साहब, मैं तो सिर्फ तारकिक बहस क ी ओर ले जाने क ी क ोशिश क र रहा था मुद्दे क ो, क्या क रूं मुद्दे हैं क ि ग्रह नक्षत्रों में उलझ जाते हैं। मुद्दों क ी उलझन से शायद मेरा पुराना नाता है।

दरअसल, प्रवीण जाखड़ जैसे लोग क िसी बात क ो आंख बंद क रक े स्वीक ार नहीं क रते। वे अंध श्रृद्घा नहीं रखते, ये सत्य क े साधक हैं, ये सत्य को खोजना चाहते हैं। धर्म को आडंबरों ये लोग धर्म क ो मुक्त कर देना चाहते हैं।

प्रवीण जाखड़ खोजी हैं। बक ौल प्रवीण जाखड़- खोजी पत्रक ारिता और खुलासे क रना मेरा पहला शौक है।
उन लोगों क े प्रतीक है जो क ुछ खोजना चाहते हैं, चाहे वह अध्यात्म ही क्यों न हो? ये हर क्षेत्र में खोजी नजरिया अपनाते है....ये अध्यात्म क ो पाना चाहते हैं, अध्यात्म क े लिए प्यासे हैं। ये भी हिन्दू धर्म क े शुभ चिंतक हैं। और मेरा यक ीं क रें ऐसे लोग ही हिन्दू धर्म क े अध्यात्म क ा प्रक ाश चहुं और फैलायेंगे


प्रवीण जाखड़ जी और संगीतापुरी जी तो बहाना है, मुझे तो कुछ कर गुजरना है...2
में पड़े -
  • बात संगीता पुरी जी की .

12 comments:

हेमन्त कुमार said...

बिना पूर्वाग्रह के प्रस्तुत होना अच्छा लगता है पर पूर्वाग्रह से रहना बात समझ में नहीं आती । आभार ।

Ratan Singh Shekhawat said...

आपकी पूरी लेखमाला पढने के बाद ही कुछ कह पाएंगे !

बी एस पाबला said...

सिक्के का दूसरा पहलू भी देखेंगे
2 में

बी एस पाबला

प्रवीण जाखड़ said...

व्यास साहब मैं ये तो नहीं जानता आप हैं कौन? कहां से हैं? क्योंकि न तो आपने अपनी तस्वीर ब्लॉग पर लगाई है और न ही अपने प्रोफाइल में शहर और कामकाज के बारे में बताया है। निवेदन करना चाहंूगा, आपने मेरे बारे में जो भी लिखा वह आपका अध्ययन है। अध्ययन शब्दों का, उनके भाव का, उनके विचार का। मुझे तो इस पूरी पोस्ट को पढ़कर यही लगा कि आप एक डॉक्टर की तरह पोस्टमॉर्टम करने में सफल हैं।

आपने सही कहा, ना मैं आडंबरों को मानता हंू, न ही कुप्रथााओं का समर्थक हंू। ज्योतिष को मैं बहुत बड़ा विज्ञान मानता हंू। ऐसा विज्ञान जो गणितीय कैलकुलेशन पर आधारित है। कैलकुलेशन है, तो वहां हर बात की प्रोबेबलिटी (जैसा मैंने इन दिनों एमबीए में प्रोबेबलिटी के बारे में पढ़ा है, कैलकुलेशन से बहुत कुछ जांचा परखा जा सकता है, यह सत्यता के करीब या तकरीबन सत्य होता है) जांची-परखी जा सकती है।
लफ्फाजी भरी बातें मैं डाइजेस्ट नहीं कर पाता। अच्छा काम करो। पूरी मेहनत से करो। कोई दूसरा कर सकता है, उससे बेहतर करने का प्रयास करो और अपना सौ फीसदी कर दो, फिर जो भी परिणाम हों, उनकी फिक्र मत करो। क्योंकि आपने अच्छा किया, अच्छी सोच, अच्छी मेहनत के साथ किया है, तो फल भी अच्छे ही होंगे। अगर कुछ फिर भी ऊंच-नीच होती है, तो कोई बात नहीं फिर चांस लो। लेकिन अपने सार्थक और निरंतर प्रयास करते रहो। बस हार मत मानो। क्योंकि सब कुछ संभव है। मैं सिर्फ इसी थीम अपना हर काम करना पसंद करता हंू। तार्किक चीजें, हमें, मुद्दों को, बातों को एक मंच देती हैं।

आपकी अगली कडिय़ों का इंतजार रहेगा।

राजीव तनेजा said...

अगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

दोनों के ही शौक निराले हैं,
आप उजागर करते जायें,
कुछ ज्ञान हमें भी मिल ही जायेगा।

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

चलिए आपने एक पक्ष की सूना दी .... दुसरे पक्ष की भी सुन के आता हूँ |

संगीता पुरी said...

पढ लिया .. प्रवीण जाखड़ जी और संगीतापुरी जी तो बहाना है, मुझे तो कुछ कर गुजरना है...2 का इंतजार कर रही हूं !!

अर्शिया said...

प्रवीण जाखड जी का कहना सौ प्रतिशत सही है, हर बात में ग्रहों की दशा बताना अति है। और वैसे भी ज्योतिष आज तक अपने आप को प्रूव नहीं कर पाया है। वह हेड और टेल का मामला ही ज्यादा है।
( Treasurer-S. T. )

प्रवीण जाखड़ said...

व्यास साहब कहां चले गए? हम आपकी अगली पोस्ट का इंतजार कर रहे हैं....। दो दिन बीत गए भाई।

pankaj vyas said...

जाखड साहिब मैं कहीं नहीं गया, इसी जहाँ में हूँ, वक्त की कमी रहती है। दूसरी पोस्ट तैयार कर रहूँ हूँ।

बी एस पाबला साहिब सिक्के के दोनों पहलूँ के साथ अलट के पलट के इधर से उधर से पूरे सिक्के को देखना मेरा लक्ष्य है । वह सिक्का किस हाथ में है किस वातावरण में है और कहाँ जा सकता है, यह बता देना चाहता हूँ....

सबसे निवेदन इस लेख माला के बहने एक अनछुये पहलू को छूना चाहता हूँ, जाहिर सी बात ेबातहै वक्ता तो लगेगा....

प्रवीण जाखड़ said...

ये बात अच्छी लगी। मैं इंतजार करूंगा।