Thursday, August 13, 2009

बाकी दिनों तो भारत मां की छाती पर मूंग दला है।

15 अगस्त आ गया है,
लोगों में देशभक्ति का नशा छा गया है,

नेता विकास क ी बात क र रहा है,
हकीक त में वह खुद का विकास क र रहा है,

पुलिस देश प्रेम, जन सेवा का संकल्प ले रही है,
दूसरे ही पल भक्षक का रूप दिखा रही है,

मास्टर बच्चों को ईमानदारी की घुट्टïी पिला रहा है,
दूसरे ही दिन स्कूल से तड़ी मार रहा है,

भ्रष्टïाचार को खत्म करने क ी क समें खाई जा रही है,
लेकिन भ्रष्टïाचार क ो शिष्टïाचार बनाने की जुगाड़ भीड़ रही है,

देशभक्ति क े तराने बजाकर, देशभक्ति की बातें क रते हैं,
मैं कहता हूं हमने तो देश भक्त होने के मुगालते पाले हैं,
सब ढक ोसला है, दो दिन 15 अगस्त, 26 जनवरी को तिरंगा लहराया है,
बाकी तो सबने हिन्दूस्तान को छला है,
इन दो दिनों भारत मां के े नाम की कसमें खाई है,
बाकी दिनों तो भारत मां की छाती पर मूंग दला है।

वृक्षारोपण कैसे करते हैं साब?

पंकज व्यास, रतलाम
आजकल बड़ा जोर हैं वृक्षा रोपण का। गांव-गांव, शहर-शहर वृक्षारोपण हो रहा है। अखबार पटे हुए हैं वृक्षारोपण की खबरों से। अलां जगह वृक्षारोपण हुआ, फलां जगह वृक्षारोपण हुआ।
एक दिन एक व्यक्ति आकर मुझे बोला-क्यों भई वृक्षारोपण किया कि नहीं?ï मैंने कहा- वृक्षारोपण करते कैसे है? पहले यह तो बता दीजिए। वह बोला देखा नहीं सब वृक्षारोपण कर रहे हैं।
मैंने कहा- वृक्ष तो रौंपे-रोपाए हैं, उन्हें रोपने की क्या जरूरत है।
वह बोला- मैं समझा नहीं!
मैंने कहा- वृक्ष तो ऑलरेडी खड़े हुए हैं। मान लो उन्हें रौपना भी चाहें, तो कैसे रोपेंगे। इतने बड़े-बड़े वृक्षों को कैसे उठाएंगे, कैसे रोपेंगे..?
वह व्यक्ति बोला- मैं उन वृक्षों की बात थोड़ी कर रहा हूं। पौधों की बात कर रहा हूूं। वृक्ष कोई रौंपे जाएंगे। पौधे रौपें जाएंगे।
मैंने कहा- जब आप पौधे रोंप रहे हैं, पौधा-रोपण कर रहे हैं तो वृक्षा रोपण क्यों बोल रहे हैं। पौधा रोपण बोलिए ना।
वह व्यक्ति हो..हो..हो.. करके हंसने लगा और कहा- तुम भी यार!
बंधुओं वह व्यक्ति तो मेरी बात पर हंसने लगा। अब आप क्या करते हैं आप जाने। पौधा रोपण को पौधा रोपण कहते हैं या वृक्षा रोपण ये आप ही जाने...। मैं गलत हूं तो बताईए?